पलाश!! तुम्हारा खत पढ़ा! पढ़ा,कई बार पढ़ा..! हर बार मेरी नज़र तुम्हारे लिखे हर्फ़ दर हर्फ़ को चूमती जाती हर बार मेरी नज़र तुम्हारे भरे ज़ज़्बात दर ज़ज़्बात चुनती जाती जब नज़रों ने भर लिया प्रेम अपार! पलाश! टपक पड़ी आँखे,गिरे बूँद हज़ार..! खत के आखिर में जहाँ मेरा नाम लिखा है और मेरे नाम पर तुम्हारे अधरों का रंग लगा है बेशक वो लाल रंग तुम्हारे पंखुडियों सी नाज़ुक नर्म होंठों के छुअन का प्यारा सा एहसास है वो हिस्सा हमेशा हमेशा मेरी रूह के पास है इस तरह! मेरे उस दस्तावेज को तुमने अग्रसारित कर दिया है पलाश! एक अदद उस कागज पर , सर्वस्व तुम्हारे नाम किया है एक अदद उस कागज़ पर हर जन्म तुम्हारे नाम किया है देवयशो 4 नवम्बर 2017
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मनु शर्मा का जाना
मनु_शर्मा_का_जाना ( १९२८ से ०८-११-२०१७ ) एक कहानी और एक खबर है, दोनों एक साथ सुना रहा हूँ! खबर ..! पहले खबर से शुरू करता हूँ.. खबर ये की दो दिन पहले मनु शर्मा जी का देहावसान हो गया। इसतरह एक और * पद्मश्री * मिटटी में विलीन हुआ, *8 खण्डों और 3000 पृष्ठों पर " कृष्ण की आत्मकथा "* लिखने वाला वह कालजयी रचनाकार राख बन गंगा में जा बैठेगा.. अस्थियां बन लहरों में बहेगा..! अब कहानी..! मुझे याद है जब मैं कक्षा 3 में पढ़ता था और मुझे अपने पिताजी के लकड़ी की आलमारी में मनु शर्मा की तीन किताबें मिली, " द्रोण की आत्मकथा','कर्ण की आत्मकथा' और 'एकलिंग का दीवान ' "। मैंने उनमे से एक चुरा ली,पढ़ने के लिए क्योंकि उस वक़्त मुझे लगता था की सुपर कमांडो ध्रुव,बांकेलाल,हवलदार बहादुर,पिंकी,चन्दामामा,चाचा चौधरी,डोगा, परमाणु,योद्धा,भेड़िया और नागराज के कॉमिक्स पढ़ना उतना ही बड़ा गुनाह है जितना जुआ खेलना या फिर हीरो हिरोइन को छोटे कपड़ों में ठुमकते देखना। इसलिए क्योंकि मेरा बचपन 90' के दौर में बीता है जब हम "किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने..या "ये...

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