हर सर्द अँधेरी सुबह सुबह
जब रात हो भीनी भीनी सी
तू ओस ओस टपकती है
हर सर्द अँधेरी सुबह सुबह
तू फ़िज़ा फ़िज़ा सी घुलती है

मद्धम मद्धम मेरे कानों में
तू नर्म हवा की हरकत है
हर सर्द अँधेरी सुबह सुबह
खिलते फूलों की चिरकन है

जब होंठो को छूकर गुज़रे
भाप में लिपटा नाम तेरा
हर सर्द अँधेरी सुबह सुबह
वो लफ्ज़ बने आयत मेरा

मेरे खातिर तेरा नाम ही इक
काफिर हालत का क़ामिल है
हर सर्द अँधेरी सुबह सुबह
मेरे सज़दे के जो काबिल है

देवयशो



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