पलाश!! तुम्हारा खत पढ़ा! पढ़ा,कई बार पढ़ा..! हर बार मेरी नज़र तुम्हारे लिखे हर्फ़ दर हर्फ़ को चूमती जाती हर बार मेरी नज़र तुम्हारे भरे ज़ज़्बात दर ज़ज़्बात चुनती जाती जब नज़रों ने भर लिया प्रेम अपार! पलाश! टपक पड़ी आँखे,गिरे बूँद हज़ार..! खत के आखिर में जहाँ मेरा नाम लिखा है और मेरे नाम पर तुम्हारे अधरों का रंग लगा है बेशक वो लाल रंग तुम्हारे पंखुडियों सी नाज़ुक नर्म होंठों के छुअन का प्यारा सा एहसास है वो हिस्सा हमेशा हमेशा मेरी रूह के पास है इस तरह! मेरे उस दस्तावेज को तुमने अग्रसारित कर दिया है पलाश! एक अदद उस कागज पर , सर्वस्व तुम्हारे नाम किया है एक अदद उस कागज़ पर हर जन्म तुम्हारे नाम किया है देवयशो 4 नवम्बर 2017

चाँद देखा आज रात 12 बजे का..
ReplyDeleteदिखी क्या
मेरी ताकती निगाहें?